wah re uparwale hindi shayari

वाह रे उपरवाले, अजब गजब तेरी लीला है। 

कहीं सूखा तो कहीं बहती आँखों से गिला है।।

वाह रे उपरवाले …………………………….।

कोई तरसता है खुशियों को, तो कोई आपनो को। 

और आपना ही कोई हवा दे जाता है जख्मो को।।

हर किसी ने दर्द उठाये, बेदर्दी ना कोई मिला है।

कहीं सूखा तो कहीं बहती आँखों से गिला है।।

वाह रे उपरवाले …………………………….।

नम देखी वो आँखे जो देखना चाहती हैं ज़माने को। 

 कौन समझाए के ना देख, है ना कुछ दिखने को।।

उजड़ा पाया है गुलशन, ना कोई फूल खिला है।  

कहीं सूखा तो कहीं बहती आँखों से गिला है।।

वाह रे उपरवाले …………………………….।

धीरे धीरे खाख सब होते पाया, मरती देखी हैं चाहते। 

जाँ तक निसार करके भी, जिन्दा रही ना मोहब्बते।।

हर कोई से सुना शादियों से चलते देखा ये सिलसिला है।  

कहीं सूखा तो कहीं बहती आँखों से गिला है।।

वाह रे उपरवाले …………………………….।

  

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