अ काश तुम मुझे समझते, एतबार यार मुझपे करते.

बहुत अभिमान था तुझपे, काश कभी तुम भी मुझपे मरते.

गर मेरे जज्बात पढ़ लेते, हम सिर्फ तुम्हारे होते.

दूर होके भी कभी जुदा न होते, संग हँसते संग संग रोते.

अगर दिल से हम भी मुस्कुराते, हर काज यार सवरते.

अ काश मुझे……………………………………………

कभी सोचा ना था के तू मतलबी हो जायेगा. 

संग संग ज़माने के, यार तू भी मुझे रुलायेगा.

अब तुमसे डरने लगे हैं, ज़माने से डरते डरते.

अ काश मुझे………………………………………

क्यू किया तूने ऐसा, मैंने तो तेरे आंसू ना बहाने दिए थे.

सारे बोझ उठाये थे मैंने, तुझे ना कोई गम ऐ सितम सहने दिए थे.

आज सब कुछ थम सा गया है, थामे ना अश्क बहते बहते.

अ काश मुझे………………………………………………

 

 

 

ना तूने कभी समझा, ना सोचा कभी समझने का.

ना गवारा गुजरा वक़्त, हर लम्हा था सिर्फ सहने का.

काश मेरे जज्बातों की करते कदर.

खुद के संग संग रखते रिश्ते की खबर.

जन्मो जन्म चलता ये रिश्ता हमारा,

बदलते ना ख्याल, बदलती ना नज़र.

के हम हैं तुम्हारे, ये नाम था सिर्फ कहने का.

ना तूने कभी समझा…………………………….

कैद तो पंछी भी ना रहे, आखिर हम तो इन्सान थे.

जो तुमने कहा वो सही, मानते रहे के हम नादान थे.

बेवफाई की सोचते भी कैसे, हम ना बेईमान थे.

हमें लगा तुम चाहते बहुत हो, हम तुम्हारे मतलब से अंजान थे.

क्यू किया के ठिकाना ही बदल दिया तुमने हमारा रहने का. 

ना तूने कभी समझा………………………………………..

 

 

 

डरते हैं कहीं ये रिश्ता कांच की तरह टूट के बिखर ना जाये.

तेरी जिद के चलते कहीं सब खाख नज़र ना आये.

हम नहीं चाहते के मेरी बर्बादी का तुम कारण बनो.

मेरी जिंदगी बर्बाद  है, तुम ना मेरी बर्बादी का हिस्सा रहो.

माना के पुरे ना होते हर एक जो सपने सजाये.

डरते हैं कहीं…………………………………………………

कुछ ऐसा भी कर लो, जिसमे हो सब की भलाई.

हार तो दोनों की है, थोड़ी तुम करो, थोड़ी हम करे समाई.

माना के कभी भुलाये ना जायेगे, लम्हे संग यार जो बिताये.

डरते हैं कहीं…………………………………………………….

इतने जज्बाती ना बनो, समझ लो दुनिया की रित रिवाज़.

संग किसके मुस्कुरयेगे, हर कोई रूठा रूठा होगा नाराज़.

अब फैसला तुम्हारा है, हमने यार जो समझाना था वो समझाये.

डरते हैं कहीं………………………………………………….

 

 

 

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