गम छुपाना कोई गुनाह तो नहीं, मगर दिल पर सितम होगा.

छलक ही आयेगे आंसू, जब तक़दीर पर हसता हर जख्म होगा.

क्या गुजारेगी दिल ऐ नादाँ पर, जानके बेवफा मेरा ही सनम होगा.

फिर भी प्यार तड़पेगा, और कहेगा शायेद ये कोई वहम होगा.

वो जुदा हो जायेगा, और किसी सूरत में दर्द न कम होगा.

शर्मसार होगी मोहब्बत उस पल, जब हमसफ़र बेशर्म होगा.

तड़पेगा तू तन्हाई में, ना कोई तुझ पर रहम होगा.

दिल टुटके होगा चूर, और फिर ना कभी मोहब्बत का जन्म होगा.

 

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