गुलाब सा खिला चेहरा, संगेमरमर सा बदन.

सुर्ख लाल होठ तेरी मुस्कान जैसे हो चमन.

क्या खूब सवारा है, बहुत खूब निखारा है,

तेरा रूप जुदा जुदा, लगे तू जां से प्यारा है,

जी चाहे यु ही तुम्हे निहारते रहे सारी उम्र,

जानते हैं तुम्हे प्यार बहुत करना कुसूर हमारा है,

काश दिल हमारा और तुम बन जाते धड़कन.

सुर्ख लाल होठ…………………………………..

ये मेरा नशीब नहीं, के पूरा हो मेरा आरमान.

तक़दीर ने रुलाया है मोहब्बत भी है अनजान.

मगर वो खुश हो तो मंजूर मुझे हर अंजाम,

तेरी खातिर सह लेगे, चाहे टूट पड़े मुझपे आसमान.

नम ना हो तेरी आँखे, चाहे भीग जाये मेरे नयन.

सुर्ख लाल होठ…………………………………….

Categories: Romantic

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