चाह के भी ना जी पाये जिंदगी, जीने की हमेशा प्यास थी.

कभी सुकून तो ना पाया दिल ने, मगर खुशियों की हर वक़्त आश थी.

आज भी ना बदला कुछ पहले जैसा मंज़र है.

वही दर्द वही तड़प आज भी तन्हा जिंदगी का सफ़र है.

कोई ना साथ चले को तैयार मेरे,

इतने जख्म देके भी ज़माने को ना सब्र है.

आधूरी रही आरजू मेरी कल जिसकी तलाश थी.

चाह के भी ना जी पाये जिंदगी…………………….

एक बार के लिए लगा के नशीब मेरा बदल जायेगा.

जो बीत गया वो कल मुझे ना रुलायेगा.

एक मित्त मिला है जिंदगी में,

शायेद मुझे वो यार बहलायेगा.

मगर ऐसा ना हुआ, मेरी हर तम्मना निराश थी,

चाह के भी ना जी पाये जिंदगी………………….

ना यार ने मलहम लगाया, ना बदली मेरी किस्मत.

हर कोई खफा मुझसे, अधूरी रही मेरी मोहब्बत.

सुनी ना किसी ने , वैसे के वैसे रहे जज्बात.

हर ख्याल मेरा हर सपने बस बनके रह गए हसरत.

वो यार भी रूठ के चला फिर से तन्हाई मेरे पास थी.

चाह के भी ना जी पाये जिंदगी………………………

 

 

 

 

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