जब देखा था तुझे पहली पहल यारा, लगा था तू मुझको जान से भी प्यारा.

नज़र हटी ना तुझसे, तेरी आँखों में नजर आया था मुझे जीवन सारा.

बहुत कुछ सोच के गये थे तुमसे मिलने, सोचा के कह देगें दिल की बात .

जिंदगी की तस्वीर बदल जाएगी, गर मिल जायेगा तुम्हारा साथ.

मैं कुछ कह नहीं पाया, तुमने भी कुछ न कहा,

कुछ पल का दीदार हुआ, और संग ले आये तुम्हारी यादों की बारात.

जब चल रहे थअ घर को, राहों में बस ख्याल था यार तुम्हारा.

जब देखा था तुझे पहली पहल यारा…………………………….

जब भी कोई ख्याल सताता, होठों पर होता तुम्हारा नाम.

एक पल मिले फिर जुदाई, था ना मुझे आराम.

इस कदर ख्वाबों में बसे थे तुम, हर पल निगाहें तुम्हे तकती थी,

बहुत किया इंतजार मगर आया ना तुम्हारा कोई पैगाम.

जाने क्या मंजूर है तक़दीर को, अब तो दिल भी है हारा.

जब देखा था तुझे पहली पहल यारा…………………………….

जो तेरे लिये देखा, क्या सच होगा कभी वो सपना.

जहा तेरी पायल की छनछन , ऐसा घर हो अपना.

काश मेरा ख्वाब मुकमल हो जाये, तू यार जिंदगी में आये,

गर हुआ ना ऐसा तो सायद उम्र भर का होगा तडपना.

आखरी ये ही फरियाद है के बन जाओ तुम नशीब हमारा.

जब देखा था तुझे पहली पहल यारा…………………………….

Categories: Romantic

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