थी कुछ मजबुरिया, थी कुछ ज़माने की रशम ओ रिवाज.

मुलाकात मुकमल न हुई, मोहब्बत बन के रह गई एक राज.

पहले भी बहुत तरसे थे, आज भी तड़पते हैं तेरी याद में.

जब उठाये हाथ रब्ब की तरफ, सिर्फ तेरा नाम था फरियाद में.

तेरे संग गुजरा हर लम्हा, मुझे बहुत रुलाता है आज.

मुलाकात मुकमल न हुई, मोहब्बत बन के रह गई एक राज.

अब कोई और ना है तमन्ना, तेरी जुदाई ने खाख किये सपने,

तन्हाई डसती है तो लिखते हैं आपनी मोहब्बत के नगमे.

बिन तेरे हर ख़ुशी से यार हु मैं बहुत नाराज.

मुलाकात मुकमल न हुई, मोहब्बत बन के रह गई एक राज.

कहता रहा मैं आपनी जुबानी, जो थी हमारी मोहब्बत की कहानी.

तेरी जुदाई और ऐ फासले, बस रह गया आँखों में पानी.

ये कैसा जीना जो बिन तेरे जीना पड़ रहा है आज.

मुलाकात मुकमल न हुई, मोहब्बत बन के रह गई एक राज.

 

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