तुझे चाह के भी मैं तन्हा ही रही, हर दर्द ऐ मोहब्बत अकेले ही सहा.

बेवफाई तूने की मोहब्बत में,  और हर किसी ने गुनाहगार मुझे कहा.

बेईम्तिहा तुझे प्यार करना क्या यार ये ही  मेरा कुसूर था.

जिन आँखों में सुरत थी तेरी, उन आँखों का हर आंसू बेमोल बहा.

 

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1 Comment

balveer · April 12, 2018 at 3:08 pm

nice

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