भीगी भीगी आँखे हैं, तन्हा तन्हा बाहें. तरस गए उन्हें देखने को, तन्हा भरते हैं आहें.

बिन उनके कैसे नादाँ ऐ दिल को बहलाये . ना वो आये ना उनकी खबर, सुनी सुनी हैं राहें.

संग उनके आशियाना बनाया था, उनकी मोहब्बत का गुलिस्ता सजाया था.

नजर कहीं ना लगे मेरे यार को, ये सोच के पलको में छुपाया था.

जुनून थे वो मेरे होठों की मुस्कान, हर ख़ुशी में संग संग पाया था.

दो बदन एक जान थे, कभी ना तन्हाई ने हमें सताया था.

जो मेरा हर दर्द उठा लेते थे, आज उन्होंने ही सितम ढाये.

जीना मेरा दुसवार हुआ है, फेरी हैं जबसे उन्होंने निगाहें.

भीगी भीगी आँखे…………………………………………..

जाने क्या हुई मुझसे खता,  जो यार वो हो गए मुझसे खफा.

हम तो ना थे कभी उनके गुनाहगार, फिर क्यों दे गए वो मुझे सजा.

पहले भी उनका नशा था, आज भी है मुझे बहुत नशा.

ये अलग बात  है की आज मुझे कहते हैं शराबी, के मेरा सहारा बना मयकदा.

वो आशिया भी काटने को आता है, और सेज पर सजे हैं कांटे,

मिजाज बदल देती थी जो बातें, आज तो डसने को आती हैं वो रातें.

भीगी भीगी आँखे……………………………………………………….

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