मजबूर थे दिल के आगे, ना चाह के भी तुम्हे चाहने लगे.

क्या कुसूर था नैनों का, जो तेरी जिद के आगे बहने लगे.

बहुत सोचा के संभल जाये अब भी, मगर ये कर ना सके.

बदलना चाहा था तक़दीर के पन्नो को, वो सवर ना सके.

आशिक तो हुए हम, पर जाने तेरी मोहब्बत पा ना सके.

सांसे थम सी गई हैं, तुझपे मरके भी हम मर ना सके.

जब से प्यार किया तुझे, तन्हा तन्हा दर्द ऐ सितम सहने लगे.

क्या कुसूर था नैनों का, जो तेरी जिद के आगे बहने लगे.

मजबूर थे दिल के आगे, ना चाह के भी तुम्हे चाहने लगे.

क्या कुसूर था नैनों का, जो तेरी जिद के आगे बहने लगे.

खता तो हो गई दिल भी हारे, मगर तुम क्यू रूठ गये.

साथी थे जन्म जन्म के, फिर कहाँ यार तुम छुट गये.

क्यू यार तरसा दिया, मुझे हमराज रुला दिया.

बहुत सपने देखे तेरे लिए, सारे सपने मेरे टूट गये.

क्या जी पायेगे बिन तेरे, इस बात से डरने लगे.

क्या कुसूर था नैनों का, जो तेरी जिद के आगे बहने लगे.

मजबूर थे दिल के आगे, ना चाह के भी तुम्हे चाहने लगे.

क्या कुसूर था नैनों का, जो तेरी जिद के आगे बहने लगे.

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