ये क्या हो गया है,  हर कोई खफा खफा है.

कुछ भी तो याद नहीं, किस गुनाह की सजा है.

नशीब मेरा मुझसे रूठा है, वक़्त ने हर बार लुटा है.

सब ठीक हो जायेगा कहता मेरा मन, ये भी तो रूठा है.

हर बार चोट खाई, जबकि किया न किसी से दगा है.

ये क्या हो गया है……………………………………..

हँसना चाह रहा हु, गम मैं छुपा रहा हु.

हंसू तो हंसू कैसे, दिल को खुद ही दुख रहा हु.

खुशियों क राह ताकता, जाने इंतजार कितना लम्बा है.

ये क्या हो गया है……………………………………….

अब इम्तिहा हुई इंतजार की, शायद आएगी ना घड़ी बहार की.

तन्हा जीये हैं अकेले जीना है, जबकि भीड़ बहुत थी संसार की.

चैन तो ना पाया दिल ने कभी, मैं चला सुकू जहा है.

ये क्या हो गया है…………………………………………

 

 

 

सोचा था एक ख्याल, तुझे ख्वाब बनाया था.

बिन पूछे तक़दीर से, दिल में तुझे बसाया था.

ना ख्वाब मेरा हुआ, ना तुम हमारे हुए.

गुस्ताखी दिल हुई, जां से तुम प्यारे हुए.

अरमां जगे थे दिल में, तब किसी ने ना समझाया था.

बिन पूछे ………………………………………………

अब कैसे भूल जाऊ, मुझमे तो तुम ही तुम बसे हो.

सुरूर तुम्हारा है, जब से मोहब्बत बन के बरसे हो.

जाने क्या बात थी तुझमे, कोई और ना मुझे भाया था.

बिन पूछे…………………………………………………

काश ऐसा हो जाये, नशीब मेरा तुम बन जाओ.

हम भी मुस्कुरा ले, अगर तुम सामने आओ.

आंसू पोछ दो तुम, ज़माने ने बहुत रुलाया था.

बिन पूछे…………………………………………….

 

 

 

कहा खो गये हो तुम, कहा ढूढू तुझे.

कोई पता ना खबर, जहा ढूढू तुझे.

अँधेरे में भटक रहा हु, सिर्फ तेरी तलाश है.

कहीं तो मिलोगे कभी तो मिलोगे, बस ये ही आश है.

काश कोई निशानी मिलती, जहा ढूढू तुझे.

कहा खो गये हो……………………….

ये तो सोचा ही नहीं था, के कभी गुम हो जाओगे तुम.

कैसे मिले अब, कहा मिल पाओगे तुम.

तेरे शहर आया, सोचा यहाँ ढूढू तुझे.

कहा खो गये हो……………………………

हर जगह निशाँ छोड़ रहे हैं, ये सोच के की  तुम भी ढूढू रहे हो मुझे.

हर गली नुकड़ पर लगाये इस्तिहार हैं,  क्या पता मेरी खबर हो जाये तुझे.

किस अँधेरी राहों में, ले के समां ढूढू तुझे.

कहा खो गये हो………………………………………

 

 

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