Lat Lag Jaye Romantic Shayari

क्या ऐसा  हो सकता है, के किसी की लत लग जाये.

भूलाना चाहा बहुत मगर, इक पल भी भूला ना पाये.

क्या ऐसा  हो सकता है, के किसी की लत लग जाये.

भूलाना चाहा बहुत मगर, इक पल भी भूला ना पाये.

बेबसी बहुत है, इस बेकरारी का राज़ मुझे समझा दो.

कैसे बेचैन दिल को समझाए, कोई तो मुझे बतला दो.

खुली हो आँखे या झपके नैन, उसके  ही ख्वाब आये.

भूलाना चाहा बहुत मगर, इक पल भी भूला ना पाये.

आदत थी ना यूं  बेचैन रहने की, ये दिल कहाँ खो गया.

ख्यालो में खोये हैं किसी के, ये क्या गजब हो गया.

बहुत किये जतन मगर, जानू ना दिल कैसे बहलाये.

भूलाना चाहा बहुत मगर, इक पल भी भूला ना पाये.

नादां तो नहीं ये दिल, क्यू करे बार बार उसका जिक्र.

अब तो तू ही बता उपरवाले, क्यू है मुझे उसकी फ़िक्र.

ना लिखते लिखते भी हर ग़ज़ल में उसका नाम सजाये.

भूलाना चाहा बहुत मगर, इक पल भी भूला ना पाये.

Categories: Romantic

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