वो परखता रहा हर बार मुझे और हम गुजरते रहे उसके इम्तिहान से.

हाल ऐसा हुआ के आज खुद ही इन्कार करते हैं खुद की पहचान से.

उसने जीने ना दिया और हम जीने की जिद पर कायम रहे.

हमने उफ़ तक नहीं की और वो तड़पाते मुझे हरदम रहे.

उसने जैसा चाहा अक्सर वैसा ही होता रहा.

वो मुझे जख्म देते रहे, और उस पर मेहरबान हमारे कर्म रहे.

मोहब्बत को बदनाम कर दिया बदल गया वो इमान से.

वो परखता रहा हर बार मुझे……………………………..

ज़माने से कहते फिरते थे के प्यार हम करते हैं बेहिसाब.

कभी तकलीफ ना दे सकते उसे, वो यार है लाजबाब.

कहना कुछ था करना कुछ था, और हमें था हर घड़ी का रोना.

ज़माने के संग करते हो दिखावा क्यू , मगर दिया ना कभी जबाब.

मतलबी था यार मेरा वो, बदल गया था जुबान से.

वो परखता रहा हर बार मुझे………………………………..

जाने क्यू दिल को आज भी उसके बदल जाने का इंतजार है.

मैंने कल भी इकरार किया था आज भी मोहब्बत का इजहार है.

उसने किया न ख्याल कभी मेरी जज्बातों का,

मैं वफ़ा करता रहा उसने दिया धोखा मुझे हर बार है.

उसने कहा कोन दिल लगता है किराये के माकन से.

वो परखता रहा हर बार मुझे………………………………

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