बिखरते देखा है गरीबी में वो रिस्ता, जो खास होता है। 

वैसे तो दोस्त बन जाते हैं हजारों, जब पैसा पास होता है।।

बिखरते देखा है ………………………………………।

 

खुदगर्ज ना समझो यारो, हम तो हर पल याद करते हैं। 

यार मेरे मुस्कुराते रहे, उपरवाले से ये फरियाद करते हैं।।

जब जब देखू खिलते गुलाब, यारो का अहसास होता है। 

बिखरते देखा है ……………………………………….।

 

ज़िंदगी की दौड़ धूप बहुत यारो, लगे हैं रोटी कमाने में। 

गरीब का वक़्त गुजर जाया करता है, ठोक्करे खाने में।।

जब थक के चूर होते हैं, मुझे तन्हाई का आभास होता है।

बिखरते देखा है …………………………………………..।

 

दो वक़्त की रोटी की चाह में, अपनों से दूरिया हो गई। 

मिलते भी कैसे, ज़िंदगी में हजारों मजबूरिया हो गई।।

यार ही नहीं यारो की याद में दिल मेरा उदास होता है। 

बिखरते देखा है ……………………………………..।  

    


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