रकीब था जमाना, हबीब समझता रहा,

कभी मैं गिरता रहा, कभी सम्भलता रहा। 

यू तो जमाना खरीद ना पाया मुझे,

मोहब्बत के दो लब्जों से बिकता रहा।। 

Categories: Good Morning

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