तकदीर और तदबीर लिखने में एक जैसा अल्फाज है,

मगर देखा जाये तो फर्क बहुत बड़ा है। 

तकदीर जैसा अल्फाज भगवान के चरणों में पड़ा है,

और तदबीर जैसा इंसान के जहन में दोस्त सा खड़ा है।। 

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