आज मेरी कलम के नीचे कोई अल्फाज नहीं हैं,

ज़िंदगी मेरी खुली किताब कोई राज़ नहीं हैं। 

तू एतबार कर या ना कर, तेरी मर्ज़ी ,

दलील ऐ पेश बेफ़जूल कोई जबाब नहीं हैं।। 

Categories: Good Night

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