हद से गुजर के भी, तेरी गली से गुजर ना पाये। 

चाहा के भूल जाये, मगर जानू ना कैसे भुलाये।।

हद से गुजर के………………………………… ।

तेरी लत जैसे लगी है, बिन तेरे  ना करार मुझे,

तेरी बातें तेरी शरारते, भूलने दे ना यार तुझे। 

जब जब सोचु तेरा ख्याल मुझे आ जाता है,

कैसे भुलाऊ बस तेरा ही रहता है इन्तजार मुझे। 

तू रूठा है यार मुझसे, ये दिल को कैसे समझाये। 

चाहा के भूल जाये, मगर जानू ना कैसे भुलाये।।

हद से गुजर के………………………………… ।

दिल बैठा जा रहा है, बेचैनी सी छा रही है,

बेबस बहुत हूँ मैं, ये तन्हाई डसते जा रही है। 

कैसे समझाऊ के तुम ही तो हो दिल का चैन,

बिन तेरे यार मेरे, मुझे कोई ख़ुशी ना भा रही है।।

कोई तो सूरत बता दो यार, के तुम्हे कैसे मनाये।  

चाहा के भूल जाये, मगर जानू ना कैसे भुलाये।।

हद से गुजर के………………………………… ।


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