मैं तड़पता रहा तेरे ख्वाबों में,

बहाता रहा अश्क तेरी यादो में।

मैं भी तो कहाँ भूली तुम्हे,

तुम्हारा ही ख्याल था मेरी फरियादों में।

 

खफा थी तू लेके किस बात को,

इतनी देर क्यू लगी इस मुलाकात को।

खफा तो नहीं बस मजबूर थी,

मैं भी तो कहां रोक पाई अश्को की बरसात को।

एक नशा था तेरा तू ही थी मेरे ख्यालो में ,

मेरा भी कहा बदला इरादा तू ही था इरादों में। 

मैं तड़पता रहा तेरे ख्वाबों में,

बहाता रहा अश्क तेरी यादो में।

मैं भी तो कहाँ भूली तुम्हे,

तुम्हारा ही ख्याल था मेरी फरियादों में।

 

बिन तेरे जीया ना जा रहा है,

तन्हा अकेले ज़हर ऐ जुदाई पीया ना जा रहा है।

बेड़िया हैं मुझे रीत रिवाजों की,

मुझसे भी तो ये दर्द सीया ना जा रहा है। 

यू घुट घुट के जीना नहीं मुझे रीत रिवाजों में।

मेरी भी तो सांसे उखड़ी उखड़ी हैं रश्म से कसमों में। 

मैं तड़पता रहा तेरे ख्वाबों में,

बहाता रहा अश्क तेरी यादो में।

मैं भी तो कहाँ भूली तुम्हे,

तुम्हारा ही ख्याल था मेरी फरियादों में।

 

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