hindi shayari

किसी किताब में ना लिखा था,

जो सबक सीखा ज़माने से। 

एक पल में समझ गए,

जो समझ आया था ना समझाने से।।

किसी किताब में……………………..।

कहने को तो चार दिन की ज़िंदगी है,

मगर गमगीन हो तो बहुत लम्बी है। 

कोई कुसूर किया ना कोई गुनाह,

फिर भी आँखों में आज शार्विन्दगी है।।

बेसुध सी होने लगी है ज़िंदगी,

सब कुछ खाख हो जाने से।।

एक पल में समझ गए,

जो समझ आया था ना समझाने से।।

किसी किताब में……………………..।

कभी सोच के भी ना सोचा था,

मतलबी इतना आज इंसान हो जायेगा। 

सुख की दो रोटी गर खाये कोई,

ये सुकून भी उसे ना भायेगा।।

जाने कितनी ख़ुशी मिलती है दुनिया को,

किसी बेबस को रुलाने से। 

एक पल में समझ गए,

जो समझ आया था ना समझाने से।।

किसी किताब में……………………..।

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