खोये खोये से हैं, पर क्यू खुद को हम तुझ में खोजते हैं। 

कभी मिले ना हुए रूबरू, फिर क्यू पल पल तुम्हे सोचते हैं। 

कभी मिले ना हुए रूबरू ………………………………….।

 

महसूस तुम्हे  करते हैं, क्यू तुम्हारा ही ख्याल आता है। 

ये कैसा रिस्ता है, क्या पिछले जन्म का कोई नाता है। 

याद तुम्हारी तड़पाती है, फिर भी खुद को ना रोकते हैं। 

कभी मिले ना हुए रूबरू ………………………………..।

 

मेरी साँसो में बसे हो, तुम जैसे दिल की धड़कन हो। 

गुलबदन हो तुम जैसे मेरे आशियाँ के गुलशन हो। 

अहसास तुम्हारी खुश्बू, हम ना इसे यार टोकते हैं। 

कभी मिले ना हुए रूबरू ………………………………।

 


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