यकीं करना मेरा गुनाह हो गया,

बदले इश्क मेरा सब खो गया। 

संग यार फूल खिलाने की चाहत थी,

जाने क्यू वो कांटे बो गया।।

यकीं करना …………………।

मुकमल हुई ना आरजू ऐ मोहब्बत,

तन्हा कर गई उसकी इनायत। 

ये अहसान ऐ दिल किया उसने,

तड़पती रह गई मेरी चाहत।।

प्यार मेरा कहानी बन गया,

जिसने सुना किस्सा वो रो गया।  

संग यार फूल खिलाने की चाहत थी,

जाने क्यू वो कांटे बो गया।।

यकीं करना …………………।

मुझे भूल जाना वो कह गये हैं,

दूर कहीं संग अश्क वो बह गये हैं। 

फासलो के दरमियां लिखे अल्फ़ाज़,

जख्म बन के दिल में रह गए हैं।।

सांसे ले गया वो मेरी धड़कन भी,

सदमा ऐ जुदाई दिल खामोश हो गया।  

संग यार फूल खिलाने की चाहत थी,

जाने क्यू वो कांटे बो गया।।

यकीं करना …………………।


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