ये इश्क़ भी कितना अजीब अहसास है।

ये इश्क़ भी कितना अजीब अहसास है। 

इक पल ना भूले हम, के तू ना पास है। 

अता ना पता मन्जिल का,

हल सूझे ना मुश्किल का। 

सुबह शाम जपता नाम तेरा,

हाल बुरा है इस दिल का। 

ज़िक्र कोई तड़पाये, फासला ना राश है। 

ये इश्क़ भी कितना अजीब अहसास है। 

काश तेरा दीदार हो जाये,

तुमको भी प्यार हो जाये। 

जिस कदर इन्तजार है मुझे,

तुझे भी इन्तजार हो जाये। 

इक दिन तुझे पाने की, अब भी आस है। 

ये इश्क़ भी कितना अजीब अहसास है। 

खाली है दिल की किताब,

लिख दो खत का जबाब। 

दिल ने पुकारा बार – बार,

मुकमल कर दो ये ख्वाब। 

अब चले आओ, तुम्हारा दीदार खास है। 

ये इश्क़ भी कितना अजीब अहसास है। 

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