ये वक़्त भी कमाल है, कभी हंसाये तो ये कभी रुलाये। 

कभी पैरो की धूल बनाता, कभी सर पे ताज बंधाये।।

ये वक़्त भी कमाल है……………………………….. ।

जो है ज़माने का हाल, देख के आँखे भी हुई बदहाल,

चैन से जीने  दे ना मरने, कैसा बिछा है ये जाल। 

ना किसी का कुछ बिगाड़ा, ना किसी का कुछ उजड़ा,

फिर क्यू खून का प्यासा जहां, हल होता ना ये सवाल।।

चाह तो टूट गई, मगर मिली जो जिंदगी कैसे मिटाये।  

ये वक़्त भी कमाल है……………………………….. ।

जीना दुस्वार कभी जी के ना जी पाये कोई,

जब टूटे मुशीबत का पहाड़, ना यार भाये कोई। 

जीना तो तन्हा है, अच्छा बुरा हर वक़्त सहना है,

खून के आंसू रोता है दिल, जब ना बहलाये कोई।।

कुछ पल सुकूं मिलता है, जब कोई तसल्ली दे जाये।  

ये वक़्त भी कमाल है……………………………….. ।

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